The Murder Mystery of the Kollam Hit-and-Run Case
एक बुज़ुर्ग साइकिल सवार की मौत पहली नज़र में एक साधारण हिट-एंड-रन हादसा लगी। लेकिन बैंक खातों, CCTV फुटेज और संदिग्ध लेन-देन ने जल्द ही एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया—क्या यह हादसा था, या बेहद सावधानी से रची गई हत्या?
23 मई 2024 की वह शाम केरल के कोल्लम शहर में किसी आम शाम जैसी ही थी।
82 वर्षीय रिटायर्ड BSNL अधिकारी सी. पप्पाचंद अपनी साइकिल पर घर से निकले थे—शायद उन्हें भी अंदाज़ा नहीं था कि यह सफर उनकी ज़िंदगी का आख़िरी सफर बनने वाला है।
सड़क पर अचानक एक कार आई, उन्हें टक्कर मारी और आगे निकल गई।
पहली नज़र में सब कुछ एक दर्दनाक हिट-एंड-रन हादसा दिखाई दिया—एक बुज़ुर्ग साइकिल सवार, एक तेज़ रफ्तार कार और कुछ ही पलों में बदल गई एक पूरी ज़िंदगी।
पुलिस की शुरुआती जाँच भी उसी दिशा में बढ़ी और मामला लगभग एक साधारण सड़क दुर्घटना बनकर बंद होने की ओर था।
लेकिन पप्पाचंद की मौत के बाद उनकी बेटी ने जब उनके बैंक खातों, निवेशों और हाल की वित्तीय गतिविधियों को ध्यान से देखना शुरू किया, तो कुछ ऐसे सवाल सामने आए जिनका जवाब किसी सड़क दुर्घटना में नहीं छिपा था।
पैसों के असामान्य लेन-देन, संदिग्ध कर्ज़, CCTV में कैद एक कार और कुछ ऐसे लोगों के बीच संपर्क जिनका इस मौत से कोई संबंध दिखाई नहीं देना चाहिए था—धीरे-धीरे एक अलग ही कहानी की ओर इशारा करने लगे।
क्या उस सड़क पर जो हुआ वह सचमुच एक दुर्घटना थी… या किसी ने एक हत्या को इतनी सावधानी से हादसे का रूप दिया था कि सच हमेशा के लिए उसी सड़क पर दफन हो जाता?
अध्याय 1
वह मौत जो एक हादसा लग रही थी।

अध्याय 1
वह मौत जो एक हादसा लग रही थी
23 मई 2024 की दोपहर।
केरल के कोल्लम शहर के असरम इलाके की एक अपेक्षाकृत सुनसान सड़क पर 82 वर्षीय रिटायर्ड BSNL अधिकारी सी. पप्पाचंद अपनी साइकिल पर जा रहे थे।
उनके लिए यह कोई असामान्य बात नहीं थी।
पूरी जिंदगी की तरह उस दिन भी वह सादगी से अपने रास्ते पर थे। न कोई महंगी कार, न कोई सुरक्षा, न किसी तरह का दिखावा।
सिर्फ एक साइकिल।
लेकिन उस सड़क पर कुछ ही क्षण बाद जो होने वाला था, वह उनकी जिंदगी का आखिरी अध्याय बनने वाला था।
एक नीले रंग की Wagon R तेजी से उनकी तरफ आती दिखाई दी।
फिर—
टक्कर।
साइकिल सड़क पर गिरी।
पप्पाचंद भी सड़क पर जा गिरे।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
अगर यह एक सामान्य सड़क दुर्घटना होती, तो टक्कर के बाद कार रुक सकती थी। ड्राइवर घबराकर बाहर निकल सकता था। आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ सकते थे।
लेकिन CCTV में दिखाई देने वाली तस्वीर कुछ और ही सवाल खड़े कर रही थी।
कार रुकने के बजाय आगे बढ़ती रही।
और पुलिस के अनुसार, वाहन ने सड़क पर गिरे पप्पाचंद को भी कुचल दिया।
पहली नजर में इसे एक hit-and-run accident समझा गया।
ड्राइवर की पहचान हुई।
उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ।
उसे हिरासत में लिया गया।
फिर उसे जमानत मिल गई।
मामला लगभग बंद हो गया।
एक सड़क हादसा।
एक बुजुर्ग की मौत।
एक आरोपी ड्राइवर।
और एक ऐसी फाइल जिसे शायद पुलिस ने यह मानकर बंद कर दिया कि इसमें अब जानने के लिए कुछ बाकी नहीं है।
लेकिन कहानी में एक चीज ऐसी थी जिसे उस समय शायद किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।
एक CCTV कैमरा।
दूर से रिकॉर्ड हुई कुछ सेकंड की तस्वीरें।
ऐसी तस्वीरें, जिनमें शायद एक पूरी हत्या का राज छिपा था।
पप्पाचंद कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टेलीग्राफर के रूप में की थी। नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी और Physics में graduation पूरी की। विभागीय परीक्षाएं पास करते हुए वह धीरे-धीरे पदोन्नत होते गए और अंततः BSNL में Assistant General Manager के पद तक पहुंचे।
2002 में रिटायर होने तक उन्होंने एक मेहनती और ईमानदार अधिकारी की पहचान बनाई थी।
लेकिन रिटायरमेंट के बाद उनकी जिंदगी बिल्कुल अलग थी।
वह सादगी से रहते थे।
जानवरों से उन्हें विशेष लगाव था। इलाके के स्ट्रीट डॉग्स को रोज खाना खिलाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।
चर्च जाना।
स्टॉक मार्केट पर नजर रखना।
अपने निवेश देखना।
और सबसे बढ़कर—
पैसे बचाना।
उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत थी। पेंशन आती थी। Fixed Deposits थे। शेयर बाजार में निवेश था और कोल्लम के महत्वपूर्ण इलाकों में संपत्ति भी थी।
लेकिन उनकी जीवनशैली देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि उनके पास इतनी संपत्ति थी।
वह साइकिल से चलते थे।
सादे कपड़े पहनते थे।
छोटे से छोटे खर्च को लेकर भी सावधान रहते थे।
पैसा उनके लिए सिर्फ संपत्ति नहीं था।
वह उनकी आदत बन चुका था।
लेकिन इसी आदत ने शायद उनके और परिवार के बीच दूरी भी पैदा कर दी थी।
उनकी पत्नी उनसे अलग रहती थीं।
बेटी रेचल शादी के बाद उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहती थीं।
बेटा कुवैत में था।
और पप्पाचंद कोल्लम में अकेले रहते थे।
यही अकेलापन आगे चलकर इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाला था।
क्योंकि किसी अपराधी के लिए अकेला इंसान सिर्फ अकेला नहीं होता।
कभी-कभी वह—
एक आसान निशाना भी होता है।
24 मई के आसपास पप्पाचंद ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
उनके अंतिम संस्कार के लिए बेटी रेचल कोल्लम पहुंचीं।
बाकी परिवार के लिए यह एक दुखद सड़क दुर्घटना थी।
लेकिन रेचल के मन में कुछ ठीक नहीं बैठ रहा था।
अपने पिता को वह जानती थीं।
उनकी आदतें जानती थीं।
उनका पैसे को लेकर स्वभाव जानती थीं।
और शायद इसी वजह से जब उन्होंने अपने पिता के बैंक अकाउंट्स और वित्तीय रिकॉर्ड देखने शुरू किए, तो कुछ चीजें उन्हें परेशान करने लगीं।
ऐसी चीजें जिन्हें शायद किसी दूसरे व्यक्ति ने सामान्य मानकर छोड़ दिया होता।
लेकिन रेचल ने नहीं छोड़ा।
और यहीं से—
एक सड़क दुर्घटना की कहानी धीरे-धीरे बदलने लगी।
क्योंकि रेचल को अपने पिता की मौत से ज्यादा परेशान कर रहे थे—
उनकी मौत से पहले हुए पैसों के लेन-देन।
और उन लेन-देन में छिपा पहला सवाल था—
आखिर एक ऐसा आदमी, जो जिंदगी भर कर्ज से बचता रहा, अचानक अपने नाम पर लिए गए कर्जों के बीच क्यों दिखाई दे रहा था?
उस सवाल का जवाब मिलने वाला था।
लेकिन जवाब जितना सामने आता गया—
मौत उतनी ही कम दुर्घटना और उतनी ही ज्यादा साजिश लगने लगी।
अध्याय 2
एक बेटी के मन में उठा सवाल।

रेचल ने अपने पिता के वित्तीय रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए तो एक के बाद एक सवाल सामने आने लगे।
सबसे पहले सामने आया—लोन।
पप्पाचंद के नाम पर कर्ज था।
यह बात अपने आप में असामान्य थी।
जिस व्यक्ति ने अपनी जिंदगी बचत और निवेश के भरोसे बनाई थी, उसे अचानक लोन लेने की जरूरत क्यों पड़ी?
फिर सामने आया दूसरा सवाल।
मौत से कुछ समय पहले पप्पाचंद ने अपने स्टॉक मार्केट निवेश का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया था।
यह उनके स्वभाव के बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहा था।
क्यों?
क्या उन्हें अचानक पैसों की जरूरत पड़ी थी?
अगर नहीं, तो उन्होंने अपनी investments क्यों बेचीं?
रेचल ने रिकॉर्ड्स को और गहराई से देखना शुरू किया।
पप्पाचंद को लगभग ₹80,000 की मासिक पेंशन मिलती थी। उनके पास लगभग ₹1 करोड़ का Fixed Deposit भी बताया गया।
फिर कुछ और लेन-देन सामने आए।
पैसा अलग-अलग खातों से निकाला गया था।
कुछ रकम Muthoot Mini Nidhi से जुड़ी जमा में गई थी।
मौत से कुछ दिन पहले PNB खाते से एक बड़ी रकम निकाली गई थी।
लेकिन जिस जगह वह पैसा जमा होना था—
वह जमा ही नहीं हुआ।
अब मामला सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं रह गया था।
रेचल ने पुलिस से संपर्क किया।
उन्होंने अपने पिता के वित्तीय रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ियों की जानकारी दी।
और यहीं से पुलिस ने उस केस को दोबारा देखना शुरू किया जिसे पहले लगभग एक साधारण hit-and-run माना जा चुका था।
जांचकर्ताओं ने घटनास्थल के आसपास के CCTV कैमरों को खंगालना शुरू किया।
मुख्य सड़क पर कैमरा नहीं था।
लेकिन सड़क के दूसरी तरफ एक घर में लगा कैमरा जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।
फुटेज में वही नीली Wagon R दिखाई दी।
पुलिस ने आसपास के इलाके के 100 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले।
धीरे-धीरे वाहन की पहचान की गई।
Wagon R हाशिफ अली के नाम पर पंजीकृत थी।
पूछताछ में पता चला कि उसने वाहन एनीमोन नाम के एक व्यक्ति को किराए पर दिया था।
एनीमोन का आपराधिक रिकॉर्ड भी पुलिस के सामने आया।
लेकिन असली कहानी अभी सामने नहीं आई थी।
क्योंकि पुलिस को सिर्फ यह पता लगाना था कि कार कौन चला रहा था।
उन्हें यह पता नहीं था कि—
कार और बैंक के बीच भी एक संबंध मौजूद था।
जब साइबर टीम ने कॉल रिकॉर्ड खंगाले, तो एक अजीब बात सामने आई।
पप्पाचंद की मौत के सिर्फ दो दिन बाद एनीमोन ने अपना SIM बदल लिया था।
एक सामान्य सड़क दुर्घटना के बाद कोई व्यक्ति अचानक अपना SIM क्यों बदलेगा?
पुलिस ने उसके पुराने और नए नंबरों की कॉल हिस्ट्री खंगाली।
और फिर एक नाम सामने आया—
सरिता।
Muthoot Mini की संबंधित शाखा की 46 वर्षीय Branch Manager।
सरिता और एनीमोन एक-दूसरे को पहले से जानते थे।
लेकिन पुलिस के लिए असली सवाल यह था—
एक बैंक मैनेजर और एक कथित habitual offender के बीच ऐसा क्या संबंध था?
और क्यों उनकी बातचीत पप्पाचंद की मौत के आसपास अचानक महत्वपूर्ण हो गई?
जवाब खोजने के लिए पुलिस को लगभग छह महीने पीछे जाना पड़ा।
क्योंकि पप्पाचंद की मौत अचानक पैदा हुई कोई घटना नहीं थी।
अगर जांच के आरोप सही थे, तो इसकी नींव—
महीनों पहले रखी जा चुकी थी।
